
समाज के किसी भी वर्ग को बदनाम करने वाला शीर्षक स्वीकार्य नहीं, नाम बदलने पर ही रिलीज होगी फिल्म — सुप्रीम कोर्ट
मनोज बाजपेयी अभिनीत फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ अपने शीर्षक को लेकर विवादों में घिर गई है। बढ़ते विरोध के बीच निर्माताओं ने नाम बदलने की सहमति जताई, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माता नीरज पांडे को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि किसी शीर्षक के जरिए समाज के एक वर्ग को बदनाम नहीं किया जा सकता। फिल्म की रिलीज पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने शीर्षक पर गंभीर आपत्ति जताई। यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज के लिए प्रस्तावित थी।
नाम बदलने के बाद ही मिलेगी अनुमति
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुयान की पीठ ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि इस तरह का शीर्षक समाज के एक हिस्से को क्यों निशाना बना रहा है और कहा कि यह नैतिकता तथा सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बदला हुआ नाम बताए बिना फिल्म की रिलीज की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही निर्माताओं को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया कि फिल्म किसी समुदाय का अपमान नहीं करती। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी तय की गई है।
याचिका में लगाए गए आरोप
फिल्म के खिलाफ दायर याचिका में आरोप है कि इसका शीर्षक जाति-धर्म आधारित पूर्वाग्रहों को बढ़ावा देता है और सांप्रदायिक सौहार्द व संवैधानिक मूल्यों के लिए प्रतिकूल है। यह याचिका भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा ने दाखिल की, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई।
कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन
फिल्म के नाम को लेकर विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी हुए और कई संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई। अंततः विवाद बढ़ने पर निर्माताओं ने शीर्षक बदलने की बात स्वीकार की। इस फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ नुसरत भरुचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय और दिव्या दत्ता प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे।






