
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पदभार ग्रहण करते ही भारतीय एयरलाइन स्पाइसजेट के लिए बांग्लादेश का हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह कार्रवाई एयर नेविगेशन शुल्क के बकाये भुगतान में देरी के कारण की गई बताई जा रही है।
राजनीतिक बदलाव के बाद नए नेतृत्व की ओर से यह पहला बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। बांग्लादेश नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बकाया शुल्क और उस पर लगने वाले ब्याज की मांग पूरी न होने पर एयरलाइन की ओवरफ्लाइट अनुमति रोक दी। विमानन नियमों के अनुसार किसी भी देश के हवाई क्षेत्र से गुजरने पर विमानन कंपनियों को तय शुल्क देना होता है, जो विमान के प्रकार के अनुसार निर्धारित होता है। इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव उन उड़ानों पर पड़ा है जो कोलकाता से पूर्वोत्तर शहरों जैसे गुवाहाटी और इंफाल के बीच संचालित होती हैं। FlightRadar24 के आंकड़ों के अनुसार अब विमानों को गंतव्य तक पहुंचने में औसतन लगभग 30 मिनट अधिक समय लग रहा है, जिससे ईंधन लागत भी बढ़ गई है।
एयरलाइन की प्रतिक्रिया
स्पाइसजेट प्रबंधन ने इसे विमानन क्षेत्र की “सामान्य प्रक्रिया” बताते हुए कहा है कि संबंधित प्राधिकरणों से बातचीत जारी है और जल्द समाधान की उम्मीद है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमित उड़ान संचालन प्रभावित नहीं हुआ है और सभी सेवाएं निर्धारित समय पर चल रही हैं। हालांकि खबर सामने आने के बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एयरलाइन पर अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र का प्रतिबंध उसकी विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। लंबा रूट और संभावित देरी यात्रियों की असंतुष्टि का कारण बन रहे हैं।
सरकारी दखल की संभावना
अब स्पाइसजेट की निगाहें नागरिक उड्डयन महानिदेशालय पर हैं कि क्या यह व्यावसायिक विवाद सुलझाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करेगा। वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही एयरलाइन के लिए बकाया भुगतान करना प्राथमिकता बन गया है ताकि पूर्वोत्तर रूट्स सामान्य हो सकें।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेतृत्व में नई सरकार बनी है। विश्लेषकों के अनुसार यह कदम भले ही वित्तीय बकाये से जुड़ा हो, लेकिन इसके समय और सख्ती को दोनों देशों के बदलते कूटनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।






