
मोबाइल ऐप और जियो-टैगिंग से होगा डाटा संग्रह, पहली बार जाति की गणना भी होगी
हर दस वर्ष में आयोजित होने वाली जनगणना इस बार पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में कराई जाएगी। जनगणना 2027 के तहत पारंपरिक कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जियो-टैगिंग आधारित मैपिंग टूल और केंद्रीकृत वेब प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। इस प्रकार यह भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। इस जनगणना का मुख्य आधार “जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS)” नामक विशेष डिजिटल पोर्टल होगा, जिसके माध्यम से दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक अभियानों में शामिल इस प्रक्रिया का संचालन किया जाएगा।
मोबाइल डिवाइस से होगा डेटा संग्रह
करीब 32 लाख गणनाकार और पर्यवेक्षक मोबाइल उपकरणों के जरिए करोड़ों घरों से जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक जानकारी एकत्र करेंगे। यह डेटा सीएमएमएस प्रणाली से तुरंत ट्रांसमिट, संकलित और सत्यापित किया जा सकेगा, जिससे त्रुटियां घटेंगी और समय की बचत होगी। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गए परिपत्र में कहा गया है कि डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग से डेटा संग्रह की गुणवत्ता, दक्षता और समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा। परिपत्र के अनुसार, यह कदम जनगणना प्रक्रिया के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा परिवर्तन साबित होगा।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा
सीएमएमएस के जरिए उपयोगकर्ता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल, हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) गठन, सुपरवाइजरी सर्किल निर्धारण, गणनाकर्मियों की नियुक्ति, पहचान पत्र जारी करने और फील्ड ऑपरेशन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। इसमें भूमिका-आधारित एक्सेस कंट्रोल और वेब-आधारित मैपिंग एप्लीकेशन भी शामिल रहेगा, जिससे घरों की जियो-टैगिंग की जाएगी। इससे क्षेत्रीय सीमाओं का अधिक सटीक निर्धारण होगा और किसी इलाके के छूटने या दोहराव की संभावना कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, यह डिजिटल डेटा भविष्य में आपदा प्रबंधन, आधारभूत ढांचा विकास और योजनाओं के निर्माण में उपयोगी रहेगा।
पहली बार शामिल होगी जातिगत गणना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है और इसमें पहली बार जाति गणना भी जोड़ी गई है। स्वतंत्रता के बाद यह देश की 16वीं जनगणना होगी, जिसमें नागरिकों को स्वयं-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी मिलेगा।
दो चरणों में होगा आयोजन
जनगणना पहले 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण स्थगित करनी पड़ी। अब इसे दो चरणों में कराया जाएगा—
• पहला चरण (अप्रैल–सितंबर 2026): मकान सूचीकरण और आवास गणना
• दूसरा चरण (फरवरी 2027): जनसंख्या गणना
पहले चरण में नागरिकों से 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। गांव या शहरी वार्ड को छोटे ब्लॉकों में विभाजित किया जाएगा, जिन्हें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक और गणना ब्लॉक कहा जाएगा। यही जनगणना की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाइयां होंगी।





