
30 अस्पतालों में 34,792 मामलों पर किए गए अध्ययन में मरीजों की औसत आयु 59.4 वर्ष पाई गई, जबकि 13.8% मरीज 45 वर्ष से कम उम्र के थे। कुल मरीजों में 63.4% पुरुष थे और 72.1% ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित थे।
दुनिया भर की तरह भारत में भी युवाओं में स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। राष्ट्रीय स्ट्रोक रजिस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर सात स्ट्रोक मरीजों में से एक की उम्र 45 वर्ष से कम है। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और तंबाकू सेवन जैसे प्रमुख कारण युवाओं को तेजी से इसकी चपेट में ला रहे हैं।
हाई बीपी सबसे बड़ा जोखिम कारक
अध्ययन बताता है कि 74.5% स्ट्रोक मरीज उच्च रक्तचाप से ग्रस्त थे। इसके अलावा 27.3% को डायबिटीज, 28.5% को तंबाकू सेवन की आदत, 22.6% धूम्रपान करने वाले और 20.2% शराब सेवन करने वाले पाए गए।
समय पर इलाज न मिलना जानलेवा
ब्रेन स्ट्रोक में समय पर उपचार न मिलना मृत्यु का बड़ा कारण बन रहा है। केवल 20.1% मरीज ही 4.5 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच पाए, जबकि 37.8% मरीज 24 घंटे बाद इलाज के लिए पहुंचे। देर से पहुंचने के कारण कई मरीजों को आपातकालीन उपचार नहीं मिल सका।
रिपोर्ट के अनुसार 60% मामलों में खून का थक्का जमने वाला स्ट्रोक पाया गया, जबकि 34.2% मामलों में दिमाग की नस फटने से रक्तस्राव हुआ। अस्पताल में मृत्यु दर 13.9% दर्ज की गई, जो तीन महीने के भीतर बढ़कर 27.8% तक पहुंच गई। वहीं 29.7% मरीज गंभीर रूप से दिव्यांग हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर उपचार ही जान बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है। साथ ही उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और तंबाकू सेवन पर नियंत्रण से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।





