ईरान में मोजतबा खामेनेई की सरकार मंजूर नहीं – ट्रंप

नए नेता के चयन में अमेरिका की भूमिका जरूरी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका अहम होनी चाहिए। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को संभावित उत्तराधिकारी बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा नेतृत्व स्वीकार्य नहीं होगा। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान के भविष्य के नेतृत्व को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस तेज हो गई है और दुनिया के कई देशों की नजर इस मुद्दे पर टिक गई है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो देश में शांति, स्थिरता और सामंजस्य स्थापित कर सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुराने तंत्र से जुड़े कठोर विचारों वाले नेताओं को ही आगे बढ़ाया गया तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। ट्रंप का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनकी भागीदारी इसलिए जरूरी है ताकि ईरान में ऐसा नेतृत्व उभर सके जो क्षेत्रीय तनाव कम करने और शांति की दिशा में काम करे।

मोजतबा खामेनेई पर ट्रंप की आपत्ति
ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मोजतबा खामेनेई को ईरान का अगला सर्वोच्च नेता बनाए जाने का विचार उन्हें स्वीकार नहीं है। उनका मानना है कि यदि उन्हें यह पद दिया गया तो ईरान की राजनीति में कठोर रुख और मजबूत हो सकता है। ट्रंप के मुताबिक केवल सत्ता परिवर्तन से हालात नहीं सुधरेंगे, बल्कि नेतृत्व की सोच और नीतियों में भी बदलाव जरूरी है।

मोजतबा खामेनेई क्यों माने जा रहे हैं प्रमुख दावेदार
मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से ईरान की सत्ता संरचना में प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। माना जाता है कि उनके ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के साथ मजबूत संबंध हैं और धार्मिक प्रतिष्ठानों में भी उनका प्रभाव बढ़ा है। यही वजह है कि उन्हें अपने पिता के बाद सर्वोच्च नेता पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि उनका चयन होता है तो इसे ईरान की मौजूदा नीतियों की निरंतरता के संकेत के रूप में देखा जाएगा। अपने बयान में ट्रंप ने वेनेजुएला का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जैसे वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका रही है, वैसे ही ईरान के मामले में भी उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण हो सकती है। ट्रंप के अनुसार कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों का असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ता है, इसलिए अमेरिका की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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