संसद का आरोपी ललित झा की मीडिया में तस्वीर देख उनके पिता और पड़ोसी हैरान

संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मास्टरमाइंड ललित झा के बड़े भाई शंभू झा ने कहा कि इस घटना में ललित की संलिप्तता पर पूरा परिवार हैरान है. हमें यकीन नहीं हो रहा कि वो ऐसा कर सकता है. बता दें कि ललित गुरुवार की शाम महेश नाम के व्यक्ति के साथ नई दिल्ली के एक थाने में पहुंचा था, जहां उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर स्पेशल सेल को सौंप दिया था। संसद पर हुए आतंकवादी हमले की बरसी पर दो लोग शून्यकाल के दौरान विजिटर गैलरी से कूद गए थे. इस दौरान बाहर दोनों आरोपियों ने कनस्तरों से पीले रंग का धुआं छोड़ा और नारेबाजी की थी. ललित के भाई शंभू झा ने कहा कि हमें नहीं पता कि ललित इस सब में कैसे शामिल हुआ. वह हमेशा इन सब चीजों से दूर रहता था. वह बचपन से ही शांत स्वभाव वाला और अंतर्मुखी रहा है. वह टीचर होने के अलावा गैर सरकारी संगठनों से जुड़ा था, यह तो हमें पता था. शंभू ने कहा कि इस घटना के बाद टेलीविजन चैनलों पर उसकी तस्वीरें देखकर हम हैरान हैं।

बुधवार रात से ही शंभू के पास लगातार कॉल्स आ रहे हैं. पुलिस के साथ ही रिश्तेदार भी ललित के बारे में पूछताछ कर रहे हैं. शंभू ने कहा कि हमने ललित को आखिरी बार 10 दिसंबर को देखा था. जब मैं अपने घर बिहार के लिए निकला था. तब ललित सियालदह स्टेशन पर हमें छोड़ने आया था. इसके अगले दिन ललित ने हमें फोन किया और कहा कि किसी काम से दिल्ली जा रहा हूं. उसके बाद से हमारी उससे कोई बात नहीं हुई।

वहीं बिहार के दरभंगा में ललित झा के पिता देवानंद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि मेरा बेटा ऐसी घटना में शामिल होगा. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता यह कैसे हुआ. ललित का नाम पहले कभी किसी भी आपराधिक मामले में नहीं रहा है. वह बचपन से ही अच्छा स्टूडेंट रहा है। ललित के पिता ने कहा कि हम पिछले 50 साल से कोलकाता में रह रहे हैं, लेकिन छठ पूजा के मौके पर हम अपने पैतृक गांव दरभंगा के रामपुर उदय में जाते हैं. इस साल हम समय पर अपने गांव नहीं आ सके. इसके बाद हम 10 दिसंबर को कोलकाता से दरभंगा के लिए ट्रेन में चढ़े, लेकिन ललित हमारे साथ नहीं आया था।

वहीं जब ललित के पड़ोसियों ने टेलीविजन पर उसकी तस्वीरें देखीं तो वे हैरान रह गए. पड़ोसियों ने कहा कि ललित हमेशा रिजर्व नेचर का रहा है. वह कोलकाता के बड़ाबाजार में लोगों के साथ बहुत कम जुड़ा रहा है. शहर के बुर्राबाजार इलाके में रवीन्द्र सारणी में चाय की दुकान चलाने वाले पापुन शॉ ने कहा कि ललित एक टीचर रहा है. यहां वह दो साल से नजर नहीं आया।

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