आगामी लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत जारी है। इस बीच, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वो पश्चिम बंगाल में अपने गढ़ को ना कमजोर होने देना चाहती हैं और ना किसी दूसरे दल को अपना वोट बैंक ट्रांसफर करना चाहती हैं। ममता ने कांग्रेस के सामने सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला दिया है। ममता ने बीजेपी को मात देने के लिए खास इलाकों में स्थानीय पार्टियों को कमान दिए जाने की वकालत की है। ममता ने एक सुझाव भी दिया कि कांग्रेस चाहे तो अपने दम पर 300 लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ सकती है। हालांकि, राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो ममता का प्रस्ताव और शर्त इतनी आसान नहीं है। प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन कोलकाता में सद्भावना रैली का नेतृत्व करने के बाद संबोधन के बीच ममता बनर्जी ने वाम दलों पर भी निशाना साधा। वह बोलीं कि वाम दल ‘इंडिया’ के एजेंडे पर नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे यह दावा भी किया कि तृणमूल की तरह बीजेपी को सीधी टक्कर कोई नहीं दे रहा है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में सीट शेयरिंग पर पेंच फंसा हुआ है। आगामी आम चुनाव में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए सत्तारूढ़ टीएमसी अलायंस को लीड करना चाहती है और सीट शेयरिंग में कांग्रेस, वाम मोर्चे को हद दिखाने से नहीं चूक रही है। सीपीएम के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा, कांग्रेस और टीएमसी 28 पार्टियों वाले विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं। पश्चिम बंगाल में सीपीएम और कांग्रेस के नेता लगातार टीएमसी के खिलाफ हमला करते देखे जा रहे हैं।
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी बोलीं- ‘मैं इस बात पर जोर देती हूं कि कुछ विशेष क्षेत्रों को क्षेत्रीय दलों के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए। कांग्रेस अकेले 300 सीटों पर लड़ सकती है, और मैं उनकी मदद करूंगी। मैं उन सीट पर चुनाव नहीं लड़ूंगी लेकिन वे अपनी बात पर अड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास भाजपा से मुकाबला करने और उनके खिलाफ लड़ने की ताकत और जनाधार है पर कुछ लोग सीट बंटवारे को लेकर हमारी बात नहीं सुनना चाहते। अगर आप बीजेपी से नहीं लड़ना चाहते तो कम से कम उसके खाते में सीट तो मत जाने दें।’’
टीएमसी समेत अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि कांग्रेस को उन राज्यों में बड़ी पार्टी का दावा छोड़ देना चाहिए, जहां उसके विधायक-सांसदों की संख्या न के बराबर है। वहां कांग्रेस की दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिये। क्षेत्रीय पार्टियों और उनके नेताओं को निर्णय लेने की छूट मिलना चाहिए। बड़े भाई की भूमिका में क्षेत्रीय पार्टियों को मौका मिले। कांग्रेस सिर्फ सहयोगी दल की तरह बीजेपी के खिलाफ चुनाव जीतने में मदद करे। ऐसे राज्यों में पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब और यूपी, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र का नाम प्रमुख है। इन राज्यों के नेता सीट शेयरिंग पर अपना फॉर्मूला स्वीकार करने की बात पर जोर दे रहे हैं।
ममता ने इस बार सीपीएम को भी निशाने पर लिया और इंडिया अलायंस के एजेंडे को कंट्रोल करने की कोशिश का भी आरोप लगाया। ममता ने कहा, मैंने विपक्षी गुट की एक बैठक के दौरान इंडिया नाम का सुझाव दिया था। लेकिन जब भी मैं गठबंधन की बैठकों में हिस्सा लेती हूं तो मुझे लगता है कि वामपंथी कंट्रोल हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्वीकार्य नहीं है. मैं उन लोगों से सहमत नहीं हो सकती, जिनके साथ मैंने 34 वर्षों तक संघर्ष किया है। ममता का कहना था कि इस तरह के अपमान के बावजूद मैंने समझौता कर लिया और इंडिया ब्लॉक की बैठकों में भाग लिया है।





