केंद्र सरकार ने उन्नाव रेप केस की पीड़िता और उसके परिवार को दी गई सीआरपीएफ सुरक्षा हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। केंद्र का कहना है कि अब पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा का कोई खतरा नहीं है। केंद्र ने कहा कि उन्नाव रेप केस से जुड़े 13 लोगों की सीआरपीएफ सुरक्षा अब आवश्यक नहीं है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता और उसके परिवार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस संबंध में पीड़िता और उसके परिवार को नोटिस जारी किया है, जिसमें अगस्त 2019 के आदेश में संशोधन की मांग की गई है। केंद्र ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि सीआरपीएफ द्वारा दी जा रही सुरक्षा को हटाया जाए और राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह स्थानीय खतरे के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था करें।
केंद्र सरकार ने बताया कि पीड़िता और उसके परिवार के लिए खतरे का आकलन किया गया है, जिसमें किसी विशेष खतरे का सबूत नहीं मिला। साथ ही, केंद्र ने कहा कि सीआरपीएफ जवानों को सुरक्षा कर्तव्यों के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और सुरक्षा कवर का दुरुपयोग हो रहा है। केंद्र ने यह भी कहा कि सीआरपीएफ सुरक्षा के तहत किए गए प्रोटोकॉल से सरकारी खजाने पर भारी खर्च हो रहा है, जो अब अनावश्यक है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क दिया:
• सीआरपीएफ जवानों के पास उचित आवास और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।
• सुरक्षा प्राप्त लोग अक्सर आपस में झगड़ा करते हैं, जिससे उन्हें संभालने में दिक्कत होती है।
• स्थानीय पुलिस का सहयोग भी नहीं मिलता और महिला सुरक्षा कर्मियों की आवश्यकता बनी रहती है।
• कई बार पीड़िता का परिवार सुरक्षाकर्मियों को बिना बताए ही चला जाता है और उन पर झूठे आरोप लगाने की धमकी देता है।
उन्नाव रेप केस के सभी मामलों को 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ से दिल्ली की अदालत में ट्रांसफर किया था और 45 दिन के भीतर सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यूपी सरकार को भी निर्देश दिया था कि वह अंतरिम मुआवजे के रूप में पीड़िता को 25 लाख रुपये दे. इस केस में दोषी पाए गए कुलदीप सिंह सेंगर उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
उन्नाव रेप केस: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से पीड़िता और उसके परिवार को दी गई सुरक्षा हटाने की मांग की






