महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित ऐतिहासिक दुर्गाड़ी किले से जुड़े 48 साल पुराने विवाद पर आज कल्याण सेशन कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने किले को मंदिर घोषित करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह सरकारी संपत्ति बना रहेगा। यह मामला लगभग पांच दशकों से लंबित था।
कल्याण सेशन कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि ऐतिहासिक दुर्गाड़ी किला एक मस्जिद नहीं, बल्कि मंदिर है। इस फैसले के बाद हिंदू संगठनों और शिवसेना के नेताओं ने दुर्गा देवी की आरती कर इस निर्णय का उत्सव मनाया। कोर्ट के न्यायाधीश ए.एस. लांजेवार ने दुर्गाड़ी किले पर मंदिर के दावे को स्वीकार कर लिया।
याचिकाकर्ता और हिंदू फोरम के अध्यक्ष दिनेश देशमुख ने मीडिया को बताया कि कोर्ट ने वक्फ बोर्ड को यह मामला ट्रांसफर करने की अन्य धर्मों की याचिका को खारिज कर दिया। यह विवाद 1971 में ठाणे जिला कलेक्टर द्वारा दुर्गाड़ी किले में मंदिर होने की घोषणा से शुरू हुआ था। बाद में मुस्लिम समुदाय ने इसे मस्जिद बताते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। 1976 में, शिवसेना के बाला साहेब ठाकरे और आनंद दिघे ने “घंटानाद आंदोलन” चलाकर इस स्थान पर मंदिर के अधिकार के लिए संघर्ष किया। उस समय भी यह विवाद ठाणे कोर्ट से कल्याण कोर्ट में स्थानांतरित किया गया। कोर्ट ने 1994 में किले की मरम्मत के लिए अनुमति दी थी, और आज भी कुछ हिस्से जीर्ण-शीर्ण स्थिति में हैं। कल्याण डीसीपी अतुल झेंडे ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। उन्होंने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। सरकारी वकील सचिन कुलकर्णी ने यह भी बताया कि किले की प्राचीन वास्तुकला को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिकता है। फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया कि दुर्गाड़ी किला एक मंदिर है और सरकारी संपत्ति बना रहेगा।
महाराष्ट्र: दुर्गाडी किले को लेकर 48 साल पुराने विवाद पर कोर्ट ने फैसला सुनाया, किले पर मस्जिद नहीं मंदिर था,





