प्रधानमंत्री मोदी की चादर 4 जनवरी को अजमेर शरीफ दरगाह पर चढ़ाई जानी है, लेकिन अब इससे पहले उसी दिन इस पर दायर याचिका पर कोर्ट में सुनवाई होगी।
राजस्थान के अजमेर में उर्स की शुरुआत के साथ ही दरगाह पर चादर चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया है। कई बड़े नेता और अभिनेता यहां चादर चढ़ाने पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में 4 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चादर दरगाह पर चढ़ाई जानी है, जिसे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू अजमेर लेकर जाएंगे। हालांकि, प्रधानमंत्री की चादर चढ़ाई जाएगी या नहीं, यह मामला अब कोर्ट पहुंच चुका है। हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने इसे रोकने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में प्रधानमंत्री कार्यालय से आने वाली चादर पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है। यह मामला अब अजमेर के सिविल जज मनमोहन चंदेल की अदालत में सुना जाएगा। विष्णु गुप्ता का कहना है कि प्रधानमंत्री की चादर भेजने से उनका केस प्रभावित होगा, इसलिए इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
याचिका में बताया गया है कि अजमेर शरीफ दरगाह से संबंधित मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को होनी है, और इसमें केंद्र सरकार उत्तरदायी पक्ष है। इसमें कहा गया है कि 4 जनवरी को प्रधानमंत्री द्वारा भेजी गई चादर विवादित ढांचे पर चढ़ाई जानी है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि विचाराधीन मामले के बीच केंद्र सरकार द्वारा चादर भेजने से न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित होगा।
बता दें कि 1947 में स्वतंत्रता के बाद से ही हर वर्ष उर्स के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री चादर भेजते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले 10 सालों से इस परंपरा का पालन कर रहे हैं। अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन परिषद के अध्यक्ष सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने इसे हिंदुस्तान की संस्कृति और सभ्यता का हिस्सा बताया है, जिसमें हर धर्म और संप्रदाय का सम्मान होता है। अब यह देखना होगा कि कोर्ट इस याचिका पर क्या फैसला करता है।






