भारत ने अगले महीने बैंकॉक में होने वाले बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नेता मोहम्मद यूनुस के बीच द्विपक्षीय बैठक कराने से इनकार कर दिया है।
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पिछले साल से ही खटास आ गई थी। इसकी शुरुआत तब हुई जब तत्कालीन बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 5 अगस्त को देश छोड़ दिया। तब से वे भारत सरकार की शरण में हैं। हालांकि, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार शेख हसीना का प्रत्यर्पण चाहती है और इसके लिए भारत सरकार से कई बार अनुरोध कर चुकी है, लेकिन अब तक इसका कोई असर नहीं हुआ। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़ गए, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया। लेकिन बांग्लादेश सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे दोनों देशों के संबंध और बिगड़ गए। इस स्थिति का बांग्लादेश को भी नुकसान हुआ, खासकर अमेरिकी आर्थिक सहायता मिलने के बाद उसकी स्थिति और कमजोर हो गई।
भारत ने किया यूनुस से मुलाकात से इनकार
भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को बड़ा झटका दिया है। उसने बैंकॉक में अप्रैल में होने वाले बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच किसी भी द्विपक्षीय बैठक से इनकार कर दिया है। बांग्लादेश सरकार लंबे समय से इस बैठक की कोशिश कर रही थी, लेकिन भारत ने स्पष्ट रूप से इसे नकार दिया।
प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद यूनुस 2-4 अप्रैल को होने वाले बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं। यह पहला मौका होगा जब दोनों किसी बहुपक्षीय मंच पर आमने-सामने होंगे। बांग्लादेश सरकार चाहती थी कि इस मौके पर दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हो, जिससे मुश्किल दौर से गुजर रहा बांग्लादेश भारत का समर्थन हासिल कर सके। लेकिन भारत ने इस अनुरोध को ठुकराकर बांग्लादेश को बड़ा झटका दिया है।





