अब तक सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट की सलाह दी जाती रही है। यदि इन परीक्षणों में कोई असामान्यता मिलती है तो कोल्पोस्कोपी या बायोप्सी जैसे टेस्ट करवाने की आवश्यकता होती है। लेकिन अब एक नई तकनीक के ज़रिए केवल खून के नमूने से ही इसका पता लगाया जा सकेगा।
कैंसर, हृदय रोगों के बाद सबसे बड़ा खतरा
पिछले दस सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हृदय रोगों के बाद कैंसर, मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। हालांकि कैंसर के इलाज और निदान में पहले से सुधार हुआ है, परंतु ग्रामीण इलाकों में इसकी सीमित पहुंच के कारण मौत का खतरा अब भी बना हुआ है। कैंसर किसी भी उम्र और लिंग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है।
स्तन और सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में सबसे सामान्य
जब महिलाओं की बात आती है, तो स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आते हैं। भारत में गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, 2023 में भारत में सर्वाइकल कैंसर के 3.4 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए और लगभग 36,000 महिलाओं की मौत हुई।
समय पर जांच जरूरी
इस कैंसर की पहचान समय पर न हो पाने से यह बढ़ता है। एम्स के वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे खून के सैंपल के जरिए सर्वाइकल कैंसर की पहचान की जा सकती है। अब तक की जांचें जैसे पैप या एचपीवी टेस्ट महंगे और जटिल माने जाते हैं। कोल्पोस्कोपी और बायोप्सी जैसी प्रक्रियाएं सीमित अस्पतालों में ही उपलब्ध हैं, खासकर छोटे शहरों और गांवों में। वहीं, नई ब्लड टेस्ट तकनीक आसान और सुलभ हो सकती है।
एम्स के मेडिकल लैब ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. मयंक सिंह के अनुसार, शरीर में मौजूद “सेल फ्री डीएनए” (CFDNA) का बढ़ना सर्वाइकल कैंसर की पहचान में सहायक हो सकता है। उन्होंने ड्रॉपलेट डिजिटल पीसीआर (DDPCR) तकनीक का उपयोग कर यह निष्कर्ष निकाला। अध्ययन में 35 कैंसर पीड़ित और 10 स्वस्थ महिलाओं के ब्लड सैंपल लिए गए। जिन महिलाओं को कैंसर था, उनमें CFDNA का स्तर अधिक था, जबकि इलाज के बाद इसका स्तर घट गया। इससे यह संकेत मिला कि CFDNA, सर्वाइकल कैंसर का एक अहम बायोमार्कर हो सकता है। हालांकि यह अध्ययन सीमित सैंपल पर आधारित था, इसलिए आगे और शोध किया जा रहा है।
लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़
महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों पर ध्यान देती रहें। शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण नहीं होते, लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता है, तब योनि से असामान्य रक्तस्राव, स्राव में बदलाव या संभोग के दौरान दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिनके परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा हो, उन्हें और सतर्क रहने की जरूरत है।
वैक्सीनेशन से है, सर्वाइकल कैंसर से बचाव
इस कैंसर से बचने के लिए वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इससे समय रहते सुरक्षा मिल सकती है और जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
नोट: संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।







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