अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई इमिग्रेशन नीति विदेशी छात्रों, विशेष रूप से भारतीय विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। अब यदि किसी छात्र का वीजा रद्द हो जाता है, तो उसे तुरंत अमेरिका छोड़ना होगा।
ट्रंप प्रशासन की यह नई नीति विदेशी छात्रों के लिए खतरे की घंटी बन चुकी है। अब वीजा रद्द होने की स्थिति में विद्यार्थी को देश छोड़ना होगा, भले ही अपराध गंभीर न हो जैसे कि केवल ट्रैफिक चालान ही क्यों न हो। आइए समझते हैं कि ट्रंप सरकार में भारतीय व अन्य विदेशी छात्र क्यों परेशान हैं…
वीजा रद्द होते ही क्या होता है?
पहले, यदि किसी छात्र का वीजा रद्द हो जाता था, तो वह अमेरिका में रहकर पढ़ाई पूरी कर सकता था, लेकिन दोबारा प्रवेश की अनुमति नहीं होती थी। अब, नए नियमों के तहत:
— छात्र का SEVIS (Student and Exchange Visitor Information System) रिकॉर्ड तत्काल समाप्त कर दिया जाता है।
— OPT (Optional Practical Training) के अंतर्गत काम करने का अधिकार भी छिन जाता है।
— छात्र का वैध कानूनी दर्जा समाप्त हो जाता है और उसे तत्काल निर्वासित किया जा सकता है।
अदालतों का क्या कहना है?
कई छात्रों ने अदालत में चुनौती दी, जहां यह पाया गया कि सरकार ने ‘न्यायिक प्रक्रिया’ का पालन किए बिना छात्रों का दर्जा रद्द कर दिया। अदालत में सरकार ने माना कि उन्होंने केवल NCIC डाटाबेस के आधार पर 6,400 छात्रों को चिन्हित किया, बिना किसी व्यक्तिगत जांच के।
विद्यार्थियों को कैसे बनाया जा रहा निशाना?
छोटे अपराधों जैसे ट्रैफिक चालान या यूनिवर्सिटी नियमों के मामूली उल्लंघनों पर भी कार्रवाई की जा रही है। कई मामलों में पुलिस केस खारिज हो चुके हैं, फिर भी छात्रों के रिकॉर्ड में नाम आने के कारण उनका वीजा रद्द किया गया है।
भारतीय छात्रों पर सबसे अधिक असर क्यों?
20 जनवरी 2025 के बाद कुल 4,736 छात्रों के SEVIS रिकॉर्ड रद्द किए गए हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। इसके अलावा चीनी, नेपाली, दक्षिण कोरियाई और बांग्लादेशी छात्र भी प्रभावित हुए हैं।
विशेषज्ञों की राय:
इमिग्रेशन वकीलों का मानना है कि यह नीति सरकार को बिना ठोस कारण के किसी भी छात्र का वीजा रद्द करने की खुली छूट देती है। पुराने नियमों को एकतरफा बदलकर छात्रों को अपराधी की तरह ट्रीट किया जा रहा है।





