बीकानेर का प्रसिद्ध करणी माता मंदिर; जहां इंसान और चूहे एक ही थाली में करते हैं भोजन

आपने शायद ही कभी ऐसा सुना होगा कि इंसान और चूहे एक ही थाली में भोजन करें, लेकिन बीकानेर के पास स्थित देशनोक के करणी माता मंदिर में यह अनोखी परंपरा आज भी जीवित है। इस मंदिर में रसोई में काम करने वाले लोग और हजारों चूहे एक साथ भोजन करते हैं।

मंदिर का इतिहास और स्थापना
करणी माता का निवास 14वीं सदी में देशनोक में था, जो बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। उन्होंने अपना जीवन गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया। बाद में उनके अनुयायियों ने यहां मंदिर बनवाया। मंदिर का निर्माण कार्य 1530 के आसपास शुरू हुआ और बीकानेर के राजा गंगा सिंह ने इसे राजपूत शैली में पूरा करवाया।

मंदिर की अनूठी वास्तुकला
मंदिर के संगमरमर से बने मुख्य द्वार, चांदी के किवाड़, माता से जुड़ी किंवदंतियों की नक्काशी, सोने के छत्र और चूहों को प्रसाद देने के लिए बनी बड़ी चांदी की थालियां श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।

चूहों का मंदिर
यह मंदिर ‘चूहों का मंदिर’ भी कहलाता है। मान्यता है कि करणी माता, उनके परिवार और अनुयायी चूहों के रूप में यहां निवास करते हैं। मंदिर में लगभग 20 हजार चूहे रहते हैं। इन चूहों में सबसे खास माने जाते हैं सफेद चूहे, जिन्हें देखना अत्यंत शुभ माना जाता है।

अनोखी परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं
– चूहों को कोई नुकसान न पहुंचे इसलिए भक्त मंदिर में धीरे-धीरे चलते हैं।
– मंदिर परिसर को शिकारी पक्षियों से बचाने के लिए चारों ओर जाली लगाई गई है।
– आरती के समय चूहों की भागीदारी एक अद्भुत दृश्य होता है।
– कहा जाता है कि करणी माता ने यमराज से अपने वंशजों को मृत्यु के बाद चूहों के रूप में पुनर्जन्म देने का वरदान लिया।
– मंदिर के कर्मचारी और चूहे एक ही थाली में भोजन करते हैं, और कई भक्त इन चूहों के जूठे भोजन को औषधीय गुणों से भरपूर मानते हैं।

रोचक तथ्य

  1. मंदिर में माता के निकट रहने वाले लोग वही प्रसाद ग्रहण करते हैं जो माता को चढ़ाया जाता है।
  2. चूहों के लिए विशेष भोजन और पानी की व्यवस्था होती है।
  3. अगर गलती से कोई चूहा मर जाए तो उसकी भरपाई चांदी या सोने के चूहे से करनी होती है।
  4. मंदिर के पुजारी ‘बारीदार’ कहलाते हैं और केवल वे ही मूर्ति के पास जा सकते हैं।
  5. साल में दो बार नवरात्रि में यहां विशाल मेला लगता है।
  6. देशनोक का 42 किमी लंबा ‘ओरण परिक्रमा’ क्षेत्र पवित्र माना जाता है।
  7. यह मंदिर कई अंतरराष्ट्रीय शोज़ और डॉक्युमेंट्रीज़ में दिखाया गया है, जैसे “The Amazing Race” और “Rats”

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