अदालत ने कहा – “अंकिता नहर में गिरी नहीं, जबरन फेंकी गई थी”
“मैं गरीब हूं, तो क्या खुद को 10,000 में बेच दूं?” अंकिता की पीड़ा उसकी व्हाट्सएप चैट में उजागर
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में शुक्रवार को कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने तीनों दोषियों, पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत कठोरतम उम्रकैद की सजा सुनाई।
अंकिता भंडारी की मौत को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट निर्णायक साबित हुई। रिपोर्ट ने साफ किया कि वह नहर में हादसतन नहीं गिरी थी, बल्कि उसे जबरन धक्का देकर फेंका गया था। ‘सडन एस्कलरेशन ऑफ बॉडी’ यानी शरीर को झटके में पानी में फेंकने की थ्योरी को बचाव पक्ष ने नकारने की कोशिश की, लेकिन फॉरेंसिक साक्ष्य और विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय ने अदालत को संतुष्ट किया।
क्या था मामला?
अंकिता ऋषिकेश के वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही थी, जिसे मुख्य आरोपी पुलकित आर्य संचालित करता था। अभियोजन के मुताबिक, अंकिता पर एक वीआईपी मेहमान को ‘विशेष सेवा’ देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उसने विरोध किया। इसी वजह से उसकी योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर दी गई।
व्हाट्सएप चैट्स में अंकिता का दर्द
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में अंकिता की व्हाट्सएप चैट्स पेश कीं, जिनमें साफ दिखा कि वह आरोपियों के अनुचित प्रस्तावों और दबाव से मानसिक रूप से परेशान थी। एक चैट में उसने लिखा था, “मैं गरीब हूं, तो क्या खुद को 10,000 में बेच दूं?” यह उसके अंदर चल रहे मानसिक संघर्ष की तीव्रता को दिखाता है।
घटना की रात क्या हुआ था?
18 सितंबर 2022 की शाम को गवाहों ने अंकिता को रोते हुए फोन पर किसी से यह कहते सुना था, “प्लीज मुझे यहां से ले जाओ।” सीसीटीवी फुटेज में उसे पुलकित आर्य के साथ स्कूटर पर देखा गया, जबकि बाकी दो आरोपी बाइक पर पीछे थे। उसी रात से वह लापता हो गई और छह दिन बाद उसका शव चीला बैराज की नहर से बरामद हुआ।
कोर्ट में ‘लास्ट सीन थ्योरी’ पर भरोसा
प्रत्यक्षदर्शी न होने के कारण कोर्ट ने ‘लास्ट सीन थ्योरी’ को अपनाया और दिल्ली हाईकोर्ट के 2009 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर परिस्थितिजन्य साक्ष्य इतने मजबूत हों कि वे किसी आरोपी की सीधी संलिप्तता साबित करें, तो गवाहों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती।
मेडिकल और फॉरेंसिक जांच से हुआ खुलासा
पोस्टमार्टम और क्राइम सीन की जांच में यह सामने आया कि नहर की पटरी पर फिसलने के कोई निशान नहीं थे। विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि अंकिता को एक झटके में पानी में फेंका गया था। उसके शरीर पर भी ऐसे कोई घाव नहीं पाए गए जो फिसलने का संकेत देते।
पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
शुरुआती जांच में पुलिस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रिजॉर्ट का सीसीटीवी खराब था और कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर भ्रम फैलाया। इसके बावजूद, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और साक्ष्यों की कड़ी ने सच सामने ला दिया।
आरोपियों को सजा
कोर्ट ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाने), 354(क) (यौन उत्पीड़न) और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 5(1)(घ) के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने माना कि यह हत्या जानबूझकर की गई और इसका मकसद पीड़िता को चुप कराना था।
परिवार की प्रतिक्रिया
जैसे ही अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई, अंकिता की मां सोनी देवी की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उन्होंने कहा, “तीनों हत्यारों को फांसी मिलनी चाहिए थी। हम इसके लिए हाईकोर्ट जाएंगे।” बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमें सजा से पूरी तसल्ली नहीं है, लेकिन शायद हमारी बेटी की आत्मा को अब थोड़ी शांति मिल सकेगी।”





