सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि अलग-अलग प्रकार की विकलांगता के आधार पर अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र तय करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत असंवैधानिक है। कोर्ट ने एक लोकोमोटर-विकलांग इलेक्ट्रीशियन को राहत दी, जिसे 58 वर्ष की उम्र में रिटायर किया गया, जबकि दृष्टिबाधित कर्मचारियों को 60 वर्ष की उम्र तक सेवा की अनुमति थी।
कोर्ट ने कहा है:
• सभी दिव्यांग कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के समान नियम होने चाहिए।
• रिटायरमेंट उम्र तय करने का अधिकार किसी कर्मचारी के पास नहीं है, यह राज्य सरकार का अधिकार है।
• राज्य को यह निर्णय समानता के सिद्धांत के तहत निष्पक्ष रूप से लेना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि:
29 मार्च 2013 को एक सरकारी ज्ञापन में दृष्टिबाधित कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 वर्ष कर दी गई थी। लेकिन 4 नवंबर 2019 को इसे वापस लेते हुए फिर से 58 वर्ष कर दी गई। अपीलकर्ता, जो 18 सितंबर 2018 को सेवानिवृत्त हुआ, उसने 60 साल की उम्र तक सेवा जारी रखने का दावा किया था, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।






