23 महीने बाद आजम खान जेल से ज़मानत पर रिहा, 104 दर्ज मामलों में से 93 केवल रामपुर में ही

करीब दो साल की लंबी कैद के बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान आखिरकार जेल से बाहर आ गए। उनकी रिहाई के समय जेल परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बड़ी संख्या में समर्थक भी जेल के बाहर मौजूद रहे। मंगलवार दोपहर लगभग 12:20 बजे, 23 महीने बाद आज़म ख़ान जिला कारागार से रिहा हुए। जेल से बाहर दो गाड़ियाँ निकलीं, पहली गाड़ी में आज़म ख़ान अपने बेटे अदीब, अब्दुल्ला, प्रतिनिधि और दो अन्य लोगों के साथ बैठे थे, जबकि दूसरी गाड़ी में उनका निजी सामान रखा था, जिसमें किताबें, कपड़े और अन्य वस्तुएँ शामिल थीं।
रिहाई से पहले सुबह से ही एलआईयू की टीमें, ड्रोन यूनिट और पीएसी के जवान मुस्तैद थे। एएसपी उत्तरी आलोक सिंह, प्रशिक्षु आईपीएस विनायक भोंसले, यातायात निरीक्षक फरीद अहमद और आठ थानों की पुलिस फोर्स मौके पर मौजूद रही। जिला कारागार के सामने बने ओवरब्रिज पर जमा भीड़ को भी पुलिस ने हटाया। रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में जुर्माने की रकम जमा होने के बाद जिला कारागार सीतापुर को आधिकारिक मेल भेजी गई, जिसके बाद उनकी रिहाई संभव हुई। कोर्ट में 3-3 हज़ार रुपये के दो जुर्माने जमा किए गए थे। आज़म ख़ान की रिहाई की खबर मिलते ही मंगलवार सुबह 5 बजे से ही समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल वर्मा और समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं के साथ समर्थक कारागार के बाहर जुटने लगे। दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ी तो सुरक्षा के मद्देनज़र अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। इस बीच सुबह लगभग 7:15 बजे आज़म ख़ान के बेटे अदीब कारागार पहुँचे और 15 मिनट रुकने के बाद बिना कुछ कहे बाहर निकल गए। वह सपा के पूर्व विधायक अनूप गुप्ता के आवास चले गए।
आज़म ख़ान पर कुल 104 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 93 मामले सिर्फ़ रामपुर में हैं। सभी मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, जिसके बाद उनकी रिहाई हुई। उनकी रिहाई के मौके पर समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा भी सीतापुर पहुँचीं। उन्होंने कहा कि वह न्यायपालिका का आभार व्यक्त करती हैं। बसपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले आज़म साहब अपने परिवार से मिलें, उसके बाद उनके निर्देशानुसार आगे की रणनीति तय होगी। फिलहाल, अगली योजना को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी।

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