दिवाली के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में ग्रीन पटाखों की बिक्री और उपयोग की चार दिनों के लिए अनुमति दी है। यह छूट 18 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक ही लागू रहेगी। त्योहार की खुशी में थोड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति सख्त शर्तों के साथ दी गई है, ताकि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण बना रहे। कोर्ट ने इसे ट्रायल आधार पर मंजूरी दी है।
ग्रीन पटाखों से कम प्रदूषण
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि केवल नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा, जो पारंपरिक पटाखों की तुलना में 20–30% कम प्रदूषण करते हैं। पारंपरिक पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध बरकरार रहेगा।
शर्तें इस प्रकार हैं:
• पटाखे फोड़ने का समय — सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम 8 बजे से 10 बजे तक सीमित रहेगा। यह छूट दिवाली की पूर्व संध्या और मुख्य दिवस पर लागू होगी।
• बिक्री की अवधि — 18 से 21 अक्टूबर तक ही बिक्री की अनुमति होगी, वह भी केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं द्वारा।
• फोड़ने का स्थान — पटाखे केवल निर्धारित स्थानों पर ही फोड़े जा सकेंगे। एनसीआर के बाहर से लाए गए पटाखों पर सख्त रोक रहेगी।
अगर कोई गैर-पंजीकृत पटाखों की बिक्री या उपयोग करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस रद्द कर तुरंत पटाखे जब्त किए जाएंगे। जिला प्रशासन और पुलिस को प्रदूषण स्तर की निगरानी और रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि पिछले महीने कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के निर्माण की अनुमति तो दी थी, लेकिन बिक्री पर रोक बनाए रखी थी। दिल्ली सरकार और आसपास के राज्यों ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिवाली पर सीमित छूट की मांग की थी। यह निर्णय सर्दियों से पहले दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इस समय पटाखों के कारण एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अक्सर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।





