जून में हुए एयर इंडिया विमान हादसे में पायलट-इन-कमांड रहे दिवंगत कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दुर्घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ जांच की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि इस जांच की निगरानी एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के अधीन की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
अहमदाबाद में जून में हुई एआई-171 विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हुई थी। इस हादसे में कैप्टन सभरवाल की भी जान गई थी। हादसे के चार महीने बाद उनके 88 वर्षीय पिता पुष्करराज सभरवाल ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में वे पहले याचिकाकर्ता हैं, जबकि दूसरा याचिकाकर्ता फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हादसे की प्रारंभिक जांच “गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण” है। उनका आरोप है कि जांच टीम मुख्य रूप से पायलटों की भूमिका पर ही केंद्रित है, जबकि पायलट अब अपनी बात रखने की स्थिति में नहीं हैं। विमान दुर्घटना जांच बोर्ड की प्रारंभिक रिपोर्ट में इस त्रासदी को मानवीय भूल का नतीजा बताया गया था।
याचिका में कहा गया है कि मौजूदा जांच पद्धति के कारण उन तकनीकी और प्रक्रियागत पहलुओं की ठीक से जांच नहीं हो पाई, जो असल में हादसे के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि चुनिंदा जानकारियों के ज़रिए चालक दल के खिलाफ गलत धारणा बनाई जा रही है, जिससे असली कारणों की खोज बाधित हो रही है और भविष्य की उड़ान सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। इसलिए एक निष्पक्ष न्यायिक निगरानी वाली जांच अनिवार्य है।
इसके साथ ही, याचिका में पांच सदस्यीय जांच समिति की संरचना पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि समिति में डीजीसीए और राज्य विमानन प्राधिकरणों के अधिकारी शामिल हैं, जिनकी अपनी निगरानी और प्रक्रियागत भूमिका सीधे तौर पर जांच से जुड़ी हुई है। साथ ही, ये अधिकारी एएआईबी के महानिदेशक के अधीन काम करते हैं, जिसके कारण वही संस्थाएं, जो नियमन और निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं, खुद जांच भी कर रही हैं — यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
एयर इंडिया हादसा: कैप्टन समित सभरवाल के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पारदर्शिता से जांच की मांग की






