आरसीटीसी लेकर आया बेहद कम किराये में 11 दिन का 7 ज्योतिर्लिंग टूर पैकेज

भारत गौरव ट्रेन योजना के तहत रेलवे ने यात्रियों को 33 प्रतिशत तक की छूट

रेलवे ने शिव श्रद्धालुओं के लिए एक सूचना जारी की है। भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी द्वारा संचालित भारत गौरव ट्रेन अब यात्रियों को 10 दिनों की विशेष आध्यात्मिक यात्रा का अवसर प्रदान कर रही है। यह यात्रा खास तौर पर उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करना चाहते हैं। सफर के दौरान यात्रियों को आरामदायक सुविधाएँ, सुरक्षित यात्रा व्यवस्था और यादगार अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।
यह यात्रा केवल धार्मिक संतोष ही नहीं देती, बल्कि इसे सुविधाजनक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए रेलवे ने विशेष प्रबंधन भी किया है। योजना के अंतर्गत अलग-अलग श्रेणियों में सीट विकल्प और रियायतें उपलब्ध हैं, ताकि हर यात्री अपने बजट और सुविधा के अनुसार यात्रा का चयन कर सके। अधिक जानकारी के लिए पूरा लेख पढ़ना उपयोगी रहेगा।

यात्रा की अवधि व विवरण
• इस यात्रा का कोड SCZBG55 है और इसे सप्त ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा नाम दिया गया है।
• कुल अवधि 10 रातें और 11 दिन रहेगी, जिसकी शुरुआत 14 अप्रैल 2026 से होगी।
• यात्री निर्धारित आरक्षित स्टेशनों से चढ़ने और उतरने की सुविधा ले सकेंगे।
• प्रमुख बोर्डिंग स्टेशन में सिकंदराबाद, कमरेंडी, निजामाबाद, धर्माबाद, मुदखेड़, नांदेड़ और पूर्णा शामिल हैं।

इन ज्योतिर्लिंगों के होंगे दर्शन
यात्रा के दौरान श्रद्धालु देश के प्रमुख शिवधामों के दर्शन करेंगे, जिनमें महाकालेश्वर मंदिर व ओंकारेश्वर (उज्जैन), नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (द्वारका), सोमनाथ मंदिर, भीमाशंकर मंदिर (पुणे), त्र्यंबकेश्वर मंदिर (नासिक) तथा घृष्णेश्वर मंदिर (औरंगाबाद) शामिल हैं।

सीटों की संख्या

कुल 702 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं—
• स्लीपर क्लास: 160
• थर्ड एसी: 490
• सेकंड एसी: 52

किराया
• सामान्य श्रेणी: ₹17,600
• थर्ड एसी: ₹26,700
• सेकंड एसी: ₹34,600

5–11 वर्ष के बच्चों लिए क्रमशः ₹16,300, ₹25,200 और ₹32,800 शुल्क निर्धारित है।

सिंगल बुकिंग करने वाले यात्रियों को सीट साझा करनी होगी।

भारत गौरव ट्रेन योजना के अंतर्गत यात्रियों को प्रोत्साहन देने हेतु रेलवे ने 33% तक की छूट भी प्रदान की है। ऐसे में श्रद्धालु इस विशेष अवसर का लाभ उठाकर अपनी शिव यात्रा को और अधिक स्मरणीय बना सकते हैं।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading