
95 वर्षों के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थान बदला जा रहा है। औपनिवेशिक दौर की विरासत को पीछे छोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पीएमओ अब अत्याधुनिक सुविधाओं और कड़ी सुरक्षा से लैस नए ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ में स्थानांतरित हो रहा है। इस बड़े बदलाव के साथ पीएम के साथ काम करने वाले शीर्ष अधिकारियों—जैसे पी.के. मिश्रा और अजीत डोभाल की भूमिका और वेतन भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
करीब 95 साल तक सत्ता का केंद्र रहा रायसीना हिल्स स्थित साउथ ब्लॉक अब इतिहास बनने जा रहा है। 1930 के दशक में ब्रिटिश वास्तुकार हरबर्ट बेकर द्वारा डिजाइन की गई यह इमारत आज़ादी के बाद से देश के सबसे प्रभावशाली प्रशासनिक केंद्रों में गिनी जाती रही। नया पीएमओ सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत बनाया गया है, जिसका निर्माण लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से डीईसी इंफ्रास्ट्रक्चर ने रिकॉर्ड समय में पूरा किया। सुरक्षा मानकों के लिहाज से यह परिसर अत्यंत सुरक्षित और आधुनिक तकनीकों से लैस है।
प्रधानमंत्री के साथ काम करने वाले 5 प्रमुख अधिकारी और उनका वेतन
- पी.के. मिश्रा (प्रधान सचिव)
प्रधानमंत्री के सबसे विश्वसनीय सलाहकारों में गिने जाने वाले मिश्रा प्रशासनिक और नीतिगत निर्णयों के प्रमुख समन्वयक हैं। कैबिनेट सेक्रेटरी रैंक के इस पद पर उनका मासिक वेतन 2.50 लाख रुपये है, साथ ही सरकारी आवास व वाहन की सुविधा भी मिलती है। - अजीत डोभाल (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार)
देश की आंतरिक-बाहरी सुरक्षा रणनीतियों के प्रमुख सूत्रधार डोभाल सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। उनका वेतन भी कैबिनेट सचिव स्तर के अनुसार 2.50 लाख रुपये मासिक है। - शक्तिकांत दास (गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक)
हालाँकि वे पीएमओ का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन आर्थिक नीतियों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। आरबीआई गवर्नर के रूप में उनका वेतन भी 2.50 लाख रुपये मासिक है, साथ ही आधिकारिक आवास मिलता है। - तरुण कपूर (सलाहकार, पीएमओ)
ऊर्जा, तेल और बुनियादी ढाँचे से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ कपूर सचिव रैंक के अधिकारी हैं। उनका मूल वेतन 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह है और उन्हें उच्च श्रेणी की सरकारी सुविधाएँ मिलती हैं। - आतिश चंद्रा (अतिरिक्त सचिव, पीएमओ)
कृषि, खाद्य सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े मामलों को संभालने वाले चंद्रा का वेतनमान 1.82 लाख से 2.24 लाख रुपये के बीच है, जिसमें भत्ते जोड़ने पर कुल आय अधिक हो जाती है।
नई इमारत की प्रमुख विशेषताएँ
नया पीएमओ परिसर अत्याधुनिक ‘ग्रीन बिल्डिंग’ मानकों पर आधारित, भूकंपरोधी और उच्च सुरक्षा तकनीकों से सुसज्जित है। इसमें प्रधानमंत्री आवास और संसद भवन को जोड़ने वाली सुरक्षित भूमिगत सुरंग भी बनाई गई है, जिससे आवागमन तेज और सुरक्षित होगा तथा वीआईपी मूवमेंट के कारण आम जनता को लगने वाले जाम में कमी आने की उम्मीद है। आने वाले 48 घंटों में सभी संवेदनशील दस्तावेज और सर्वर नए परिसर में स्थानांतरित कर दिए जाएंगे। वहीं पुराने साउथ ब्लॉक को भविष्य में ‘युगे युगीन भारत’ नामक राष्ट्रीय संग्रहालय में बदलने की योजना पर कार्य जारी है।





