राजस्थान सरकार की योजना है कि प्रदेश के 291 निकाय और 7 हजार पंचायतों में एक साथ चुनाव कराए जाएं। इसके लिए सब कमेटी एक साथ चुनाव कराने में आने वाली चुनौतियों का अध्ययन करेगी और कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से राय लेकर अपनी अनुशंसा पेश करेगी। वन स्टेट-वन इलेक्शन लागू करने के लिए राजस्थान की सरकार सक्रिय हो गई है और इसके लिए विभिन्न कमेटियों का गठन करने जा रही है। ये कमेटियां जल्द ही वन स्टेट-वन इलेक्शन की संभावनाओं का अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। माना जा रहा है कि इसके लिए कैबिनेट सब कमेटियां बनाई जाएंगी जो अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को सुझाव देंगी। इस प्रक्रिया में सरकार एक्ट में बदलाव के लिए जरूरी कदम भी उठा सकती है। इसके लिए सरकार ऑर्डिनेंस ला सकती है या फिर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर बिल पारित करवा सकती है, हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।
राजस्थान सरकार की योजना के तहत प्रदेश के 291 निकाय और 7 हजार पंचायतों में एक साथ चुनाव कराने की मंशा है। सब कमेटी इन चुनावों में आने वाली बाधाओं का अध्ययन करेगी और कानूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए कानूनविदों से परामर्श लेकर अपनी अनुशंसा पेश करेगी।
निकाय और पंचायत चुनाव टल सकते हैं: ऐसी संभावना है कि नवंबर में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायतों के चुनाव स्थगित किए जा सकते हैं। विशेष रूप से ब्यावर, पुष्कर, नसीराबाद, टोंक, डीडवाना, मकराना, बीकानेर, चूरू, राजगढ़, श्रीगंगानगर, सूरतगढ़, हनुमानगढ़, अलवर, भिवाड़ी, थानागाजी, महुआ, सीकर, नीमकाथाना, खाटूश्यामजी, झुंझुनूं, बिसाऊ, पिलानी, फलौदी, जैसलमेर, बाड़मेर नगरपरिषद, बालोतरा, सिरोही, माउंटआबू, पिण्डवाड़ा, शिवगंज, पाली, सुमेरपुर, जालोर, भीनमाल, कैथून, सांगोद, छबड़ा, मांगरोल, भरतपुर, रूपवास, उदयपुर, कानोड़, बांसवाड़ा, प्रतापपुरी गढ़ी, चितौड़गढ़, निम्बाहेड़ा, रावतभाटा, राजसमंद और आमेट में इस नवंबर में बोर्ड कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। इस स्थिति में सरकार इन क्षेत्रों की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपकर कार्यकाल को आगे बढ़ा सकती है।
राजस्थान में ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के लिए बनेगी कमेटी, टल सकते हैं चुनाव






