उत्तराखंड: उत्तरकाशी में 48 घंटे के अंदर सातवीं बार लगे भूकंप के झटके

उत्तरकाशी में लगातार भूकंप के झटकों ने लोगों में दहशत पैदा कर दी। शुक्रवार को भूकंप के कारण वरुणावत पर्वत के भूस्खलन क्षेत्र से मलबा और पत्थर गिर गए थे।
देहरादून: उत्तरकाशी में शनिवार सुबह और शाम को फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए। इससे पहले शुक्रवार को भी तीन बार तेज भूकंप के झटके आए थे। 48 घंटे में सातवीं बार झटकों से लोग सहमे हुए हैं। जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 5:48 पर भूकंप महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 2.04 मापी गई। इसका केंद्र तहसील डुण्डा के ग्राम खुरकोट और भरणगांव के बीच के वन क्षेत्र में था। फिलहाल जिले में कहीं से भी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। जिला प्रशासन ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग ने अभी इन झटकों का सही माप नहीं दिया है। इसके अलावा, सुबह पांच बजे के करीब तीन और झटके महसूस किए गए, जिनमें से दो का अनुभव हुआ और एक नहीं।
उत्तरकाशी में शुक्रवार को तीन बार भूकंप के झटके महसूस हुए। राज्य की बात करें तो इस महीने बागेश्वर जिले में भी भूकंप आया है। पिछले महीने भी उत्तराखंड में कई बार भूकंप के झटके दर्ज किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, शनिवार सुबह 7:41 पर उत्तरकाशी में 2.7 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद सुबह 8:19 पर 3.5 तीव्रता का झटका महसूस किया गया। स्थानीय लोगों ने पौने ग्यारह बजे भी झटके महसूस होने की बात कही। इन झटकों से लोगों में डर का माहौल बन गया है। पिछले महीने भी राज्य में भूकंप के पांच झटके महसूस हुए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में देशभर में 44 भूकंप आए, जिनमें सबसे ज्यादा छह मणिपुर में और पांच-पांच उत्तराखंड और असम में आए।

वरुणावत पर्वत के लिए ₹5 करोड़ की राशि जारी होगी
आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा से निपटने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। भूकंप की पूर्व सूचना के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम पर काम हो रहा है। वरुणावत पर्वत के ट्रीटमेंट के लिए जिला प्रशासन ने ₹5 करोड़ की मांग की है, जिसे जल्द जारी किया जाएगा।

क्यों आते हैं भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्रमुख प्लेट्स होती हैं, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जहां ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, वह स्थान फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के किनारे मुड़ जाते हैं। जब दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तो ये प्लेट्स टूटने लगती हैं। इससे ऊर्जा बाहर निकलती है और डिस्टर्बेंस के कारण भूकंप आता है।

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