जयपुर। भजनलाल सरकार ने जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो-दो नगर निगमों को फिर से एकीकृत कर दिया है। अब इन तीनों शहरों में सिर्फ एक ही नगर निगम होगा, यानी प्रत्येक शहर में केवल एक महापौर होगा। इसके आधार पर नए सिरे से परिसीमन और वार्डों का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद स्वायत्त शासन विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। हालांकि, मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने तक वर्तमान नगर निगम अलग-अलग रूप में कार्य करते रहेंगे। कार्यकाल समाप्त होने के दिन से यह अधिसूचना प्रभावी होगी। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य शहरी प्रशासन की दक्षता बढ़ाना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है।
जन सुविधा बढ़ाने का दावा, लेकिन मिला सिर्फ राजनीतिक लाभ
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 18 अक्टूबर 2019 को जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो-दो नगर निगमों का गठन किया था। जयपुर में ग्रेटर और हेरिटेज, जोधपुर में उत्तर और दक्षिण, तथा कोटा में उत्तर और दक्षिण नाम से अलग-अलग निगम बनाए गए थे। विषय विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग निगम बनाने का उद्देश्य बेहतर प्रशासन और जनता को अधिक सुविधाएं प्रदान करना था। लेकिन वास्तविकता में प्रशासनिक खर्चों में बढ़ोतरी हुई और निगमों के कामकाज में तालमेल की कमी देखने को मिली। भाजपा ने लगातार आरोप लगाया कि कांग्रेस ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए अलग-अलग निगमों का गठन किया था।






