विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में लगभग 38,000 पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि हुई थी। अमेरिका में 80% मामलों का शीघ्र निदान हो जाता है, जिससे इलाज की संभावना बेहतर होती है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को प्रोस्टेट कैंसर का गंभीर और आक्रामक रूप होने की पुष्टि हुई है। 82 वर्षीय बाइडन की बीमारी अब हड्डियों तक फैल चुकी है। उनके परिवार ने बताया कि वे डॉक्टरों से बेहतर इलाज के विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं।
बाइडन को मूत्र संबंधी समस्या के बाद जांच कराई गई, जिसमें उनके प्रोस्टेट में नोड्यूल पाए गए। मेडिकल परीक्षणों में ग्लीसन स्कोर 9 (ग्रेड ग्रुप 5) आया, जिससे यह उच्च श्रेणी के कैंसर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बताया कि यह कैंसर हार्मोन-संवेदनशील है, जिससे इसका इलाज संभव है, लेकिन यह बेहद आक्रामक प्रकृति का है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर बाइडन के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने लिखा कि वे और मेलानिया इस खबर से दुखी हैं और बाइडन परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
कमला हैरिस ने भी समर्थन जताते हुए बाइडन को “योद्धा” बताया। उन्होंने और उनके पति डगलस एमहॉफ ने एक्स पर पोस्ट कर बाइडन के साहस और दृढ़ता की सराहना की और उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
हाल ही में, बाइडन के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक जानकारी सामने आई थी। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि बीमारी उनकी हड्डियों में मेटास्टेसिस कर चुकी है। स्थिति के गंभीर होने के चलते, गिरने का जोखिम उनकी रिकवरी को और मुश्किल बना सकता है। ऐसे में बाइडन को चलने के लिए रेलिंग, छोटी सीढ़ियाँ और सीमित दूरी की सैर जैसी सुविधाएं मुहैया कराई गईं।
खबर है कि इसी कारण उन्होंने पिछले वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से खुद को अलग कर लिया था। साथ ही यह भी सामने आया कि डेमोक्रेट खेमे में व्हीलचेयर की संभावित जरूरत पर भी चर्चा हुई थी, हालांकि इस पर सार्वजनिक रूप से बात नहीं की गई।
20 मई को बाइडन से जुड़ी एक किताब ‘Original Sin’ रिलीज होने जा रही है, जिसमें उनकी बिगड़ती सेहत और चुनावी फैसलों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर प्रायः बुजुर्गों में देखा जाता है, लेकिन अब यह युवाओं को भी प्रभावित कर रहा है। प्रोस्टेट कैंसर के आक्रामक रूप की सटीक पहचान अभी भी चिकित्सा विज्ञान के लिए चुनौती बनी हुई है।






