बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के इस्तीफे की संभावनाएं उस समय तेज़ हो गई हैं, जब देश गंभीर राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा है और अंतरिम सरकार अब तक आगामी संसदीय चुनावों को लेकर कोई स्पष्ट योजना पेश करने में विफल रही है। इस बीच, बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने सरकार से दिसंबर तक चुनाव कराने की दिशा में काम तेज़ करने को कहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक निर्वाचित सरकार ही देश के भविष्य से जुड़े अहम निर्णय ले सकती है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर यूनुस इस्तीफे पर विचार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि राजनीतिक दलों के बीच सहमति की कमी के चलते सुचारू रूप से कार्य करना संभव नहीं है। बीबीसी बांग्ला सेवा के अनुसार, नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख एनहिद इस्लाम ने बताया कि उन्होंने यूनुस से मुलाकात की थी और इस दौरान यूनुस ने संकेत दिए कि वे मौजूदा परिस्थितियों में काम करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
“राजनीतिक सहमति के बिना कार्य करना मुश्किल”
एनसीपी संयोजक ने बताया कि यूनुस ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक राजनीतिक दलों में आपसी सहमति नहीं बनती, तब तक वे अपने दायित्व नहीं निभा पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा, “अगर राजनीतिक दल मेरा इस्तीफा चाहता है, और मुझे उनका विश्वास व समर्थन नहीं मिलता, तो मैं इस पद पर क्यों रहूं?”
सरकार पर लगातार बढ़ रहा दबाव
पिछले कुछ दिनों में यूनुस की सरकार पर दबाव काफी बढ़ा है। सबसे बड़ी चुनौती सेना के साथ बिगड़ते संबंध हैं। पिछले वर्ष छात्र आंदोलन के दौरान सेना ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था, और बाद में यूनुस को सत्ता में लाने में मदद की थी। यह आंदोलन “स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन” (एसएडी) के नेतृत्व में हुआ था, जिसके कई सदस्य अब एनसीपी से जुड़े हुए हैं।
सेना का समर्थन भी घटा
हाल के घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि सेना अब यूनुस सरकार के साथ पहले जैसा सहयोग नहीं कर रही। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर चुकी सेना ने हालांकि शेख हसीना को सुरक्षित भारत लौटने में सहायता प्रदान की थी। यूनुस को मुख्य सलाहकार बनाए जाने में भी सेना की अहम भूमिका रही थी, जो एसएडी की प्रमुख मांगों में से एक थी।





