सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित की गई है। तब तक निकिता पांडेय सेवा में बनी रहेंगी।
नई दिल्ली: वायुसेना की विंग कमांडर निकिता पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि निकिता एक विशेषज्ञ फाइटर कंट्रोलर हैं और उन्होंने ऑपरेशन बालाकोट और हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय वायुसेना की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली में अपने तकनीकी योगदान से अहम भूमिका निभाई है। विंग कमांडर निकिता की सेवा के 14 वर्ष पूरे हो चुके हैं, और उन्हें स्थायी कमीशन न मिलने के कारण सेवा से मुक्त किया जा रहा है। इसी के खिलाफ उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एनके मेनन सिंह की पीठ ने सुनवाई की और अंतरिम राहत के तौर पर आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक निकिता को सेवा से न हटाया जाए। साथ ही, अदालत ने कहा कि सेना में स्थायित्व और भविष्य की स्पष्टता जरूरी है, ताकि अधिकारियों के मन में असुरक्षा की भावना न पनपे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा कि अब तक निकिता को स्थायी कमीशन क्यों नहीं दिया गया। अदालत में केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि यह फैसला मूल्यांकन बोर्ड की रिपोर्ट पर आधारित होता है और निकिता के मामले की समीक्षा के लिए एक नया बोर्ड गठित किया जा रहा है। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में केवल उन्हीं अधिकारियों को शॉर्ट सर्विस कमीशन में भर्ती किया जाए, जिन्हें स्थायी कमीशन मिलने की संभावना हो। न्यायालय ने भारतीय वायुसेना की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके अधिकारी जिस समर्पण और कौशल से काम करते हैं, वह देश के लिए गर्व की बात है।




