निजीकरण के बाद खराब होती एअर इंडिया की छवि: अहमदाबाद हादसे ने बढ़ाई मुश्किलें

एअर इंडिया, जिसकी स्थापना 1932 में उद्योगपति जे.आर.डी. टाटा ने की थी, को 1953 में भारत सरकार ने अपने अधीन ले लिया था। वर्षों बाद, 2022 में इसे 2.2 अरब डॉलर के सौदे में टाटा समूह को सौंप दिया गया। लेकिन हाल ही में अहमदाबाद में हुए विमान हादसे ने एअर इंडिया की पहले से बिगड़ती साख को और बड़ा झटका दिया है।
देश की सबसे प्रतिष्ठित विमानन कंपनियों में से एक एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान गुरुवार को अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद हादसे का शिकार हो गया। इस विमान में 242 लोग सवार थे, जिसमें चालक दल के सदस्य भी शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, इस दुर्घटना में जीवित बचने की संभावना बेहद कम है।
निजीकरण के बाद लगातार आलोचनाओं का सामना कर रही एअर इंडिया की सेवाओं पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। केंद्रीय मंत्री तक सुविधाओं को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। ऐसे में यह हादसा कंपनी के लिए एक और बड़ा संकट बन गया है। यह सवाल भी उठ रहा है कि टाटा समूह ने एयरलाइन की साख बहाल करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।
सरकारी स्वामित्व के दौरान एअर इंडिया पर कुप्रबंधन और प्रतिस्पर्धा के चलते भारी कर्ज चढ़ता गया था। टाटा समूह ने इसे उबारने की कोशिशें शुरू की थीं, लेकिन सेवा और प्रबंधन की खामियों ने इसकी छवि को सुधारने नहीं दिया। अहमदाबाद हादसा अब इस कोशिश पर एक और धक्का है और आने वाले समय में कंपनी की राह और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
वर्तमान में एअर इंडिया 43 घरेलू और 41 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित करती है। मई तक के आंकड़ों के अनुसार इसके पास 191 विमान हैं, जिनमें एयरबस और बोइंग दोनों कंपनियों के नैरो और वाइड बॉडी मॉडल शामिल हैं। यह देश की एकमात्र एयरलाइन है जो ऑस्ट्रेलिया से लेकर यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक सीधी उड़ानें उपलब्ध कराती है। इसकी सहायक इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस 55 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक उड़ान भरती है, खासकर खाड़ी देशों पर केंद्रित।

विलय की कहानी
टाटा समूह ने एअर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का विलय विस्तारा और AIX कनेक्ट के साथ कर दिया है। इस विलय के बाद यह इंडिगो के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा विमानन समूह बन गया है, जो देश के घरेलू विमानन बाजार का लगभग 30% हिस्सा नियंत्रित करता है। सिंगापुर एयरलाइंस, जो विस्तारा की सह-स्थापक है, अब संयुक्त एयर इंडिया समूह में 25% हिस्सेदारी रखती है।
टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एअर इंडिया को दोबारा खड़ा करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अहमदाबाद जैसे हादसे कंपनी की छवि पर गहरा असर डालते हैं। यात्रियों की सुरक्षा और सेवा गुणवत्ता की चुनौतियों के बीच एअर इंडिया को अपनी विश्वसनीयता दोबारा हासिल करने के लिए अब और भी सधे कदम उठाने होंगे।

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