अजित पवार की अंतिम यात्रा कल, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का अंतिम संस्कार कल उनके पैतृक क्षेत्र बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

अजित पवार के असामयिक निधन से न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में शोक की लहर है। सरकार की ओर से आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया गया है कि उनका अंतिम संस्कार 29 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे बारामती में संपन्न होगा। अनुशासन, सख्त प्रशासन और विकासोन्मुखी सोच के लिए पहचाने जाने वाले इस जननेता को यह राजकीय विदाई महाराष्ट्र की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ को श्रद्धांजलि होगी।

अजित पवार का पार्थिव शरीर गुरुवार सुबह मुंबई से सड़क मार्ग के जरिए बारामती लाया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए विद्या प्रतिष्ठान परिसर में विशेष इंतजाम किए गए हैं, जहां आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। अनुमान है कि महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से लाखों समर्थक और कार्यकर्ता ‘दादा’ के अंतिम दर्शन के लिए बारामती पहुंचेंगे। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
महाराष्ट्र सरकार ने अजित पवार के सम्मान में राज्य में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। अंतिम संस्कार के दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और देशभर के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। तिरंगे में लिपटे अजित पवार को विदा करना राज्य के लिए एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है।

कर्मभूमि में अंतिम विश्राम
बारामती अजित पवार की राजनीति की धुरी रही है। उन्होंने इस क्षेत्र को विकास और उद्योग के नए आयाम दिए। अब उसी मिट्टी में उनका अंतिम संस्कार होना स्थानीय लोगों के लिए बेहद भावुक क्षण है। यह विदाई केवल एक नेता को अंतिम सलाम नहीं, बल्कि उस विरासत को नमन है जिसने आने वाली पीढ़ियों को राजनीति में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

नेताओं की प्रतिक्रियाएं
पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “हमने ऐसा साथी खो दिया है जो प्रशासन और जनता, दोनों की भाषा समझता था। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार उनके व्यक्तित्व के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।”
सुप्रिया सुले ने कहा, “यह परिवार के लिए बेहद कठिन समय है। महाराष्ट्र की जनता का इस दुख की घड़ी में साथ देना हमारे लिए संबल है।”
अन्य विपक्षी नेताओं ने भी अजित पवार को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी नेता बताया।

आगे की सियासी राह
अंतिम संस्कार के बाद राज्य की राजनीति में कई सवाल खड़े होंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कमान अब कौन संभालेगा और महायुति सरकार में उनके स्थान की भरपाई कैसे होगी। साथ ही, उनके निधन से जुड़ी जांच पर भी सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

अनुशासन की अंतिम छाप
अजित पवार अपने सख्त अनुशासन के लिए जाने जाते थे। प्रशासन ने भी उनकी कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं इस तरह की हैं कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। उनकी अंतिम यात्रा भी उसी अनुशासन और व्यवस्था की मिसाल बनकर सामने आ रही है, जिसे उन्होंने जीवन भर अपनाया।

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